अब आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों की मजबूत होगी नींव, सीएम केजरीवाल ने लांच किया ‘खेल पिटारा’
- बच्चों के भविष्य को आकार देने के लिए दिल्ली के 11 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों में बांटी जाएगी किट, अब तक 7500 केंद्रों को मिला
- गरीबों के बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों में जाते हैं और अमीरों के बच्चे प्राइवेट क्रेच में जाते हैं, हम इस अंतर को खत्म करना चाहते हैं- अरविंद केजरीवाल
- हम चाहते हैं कि प्राइवेट क्रेच जैसी शानदार सुविधाएं गरीबों के बच्चों को भी आंगनवाड़ी केंद्रों में मिले- अरविंद केजरीवाल
- आंगनवाड़ी केंद्रों केवल बच्चों के खिलाने व पोषण का ही नहीं, बल्कि अर्ली चाइल्डहुड लर्निंग का सेंटर भी होना चाहिए- अरविंद केजरीवाल
- दिल्ली के सरकारी स्कूलों के टीचर्स की तरह ही आंगनवाड़ी वर्कर्स को भी बड़े-बड़े संस्थानों में ट्रेनिंग के लिए भेजेंगे- अरविंद केजरीवाल
- नॉन टीचिंग कार्य से आंगनवाड़ी वर्कर्स को मुक्ति दिलाएंगे, ताकि वे बच्चों पर अधिक फोकस कर सकें- अरविंद केजरीवाल
- हम अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन किट के प्रभाव पर फीडबैक भी लेंगे और जरूरत के अनुसार सुधार करेंगे- अरविंद केजरीवाल
- खेल पिटारा दुनिया भर में वर्ल्ड क्लास अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन की मिसाल बनेगा- आतिशी
- त्यागराज स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में सीएम अरविंद केजरीवाल ने आंगनवाड़ी वर्कस, सीडीपीओ, पर्यवेक्षकों को किया संबोधित
नई दिल्ली, 20 जुलाई 2023
सीएम अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों के लिए ईसीसीई किट (खेल पिटारा) लांच किया। इस खेल पिटारा किट में खेल सामग्री, खिलौने और सरक्षरता संबंधी संसाधनों को शामिल किया गया है। इसमें मैनुअल की सुविधा भी है, जो प्रत्येक सामग्री के इस्तेमाल को लेकर विस्तार से मार्गदर्शन करेगा। त्यागराज स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ज्यादातर गरीब लोग अर्ली चाइल्डहुड शिक्षा के लिए अपने बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों में भेजते हैं, जबकि अमीर लोग क्रेच में भेजते हैं। हम इन दोनों के बीच के अंतर को खत्म करना चाहते हैं। हम आंगनवाड़ी में बच्चों को वैसा ही वातावरण देना चाहते हैं, जैसा प्राइवेट क्रेच में मिलता है। सीएम ने कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के टीचर्स की तरह ही आंगनवाड़ी वर्कर्स को भी हम बड़े-बड़े संस्थानों में भेजकर ट्रेनिंग दिलवाएंगे और सबको नॉन टीचिंग कार्य से मुक्ति दिलाएंगे, ताकि वे बच्चों पर अधिक फोकस कर सकें। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री आतिशी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एससीईआरटी द्वारा तैयार किए गए इस खेल पिटारा किट को बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लांच किया। इस दौरान एक वीडियो के जरिए खेल पिटारा की खूबियों के बारे में बताया गया। खेल पिटारा को बच्चों की जरूरतों और सिखने के तरीके को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसमें पजल्स, स्टेशनरी समेत कई रोचक चीजें शामिल हैं। इसके प्रयोग से आंगनवाड़ी वर्कर्स बच्चों को खेल-खेल में सिखने और भविष्य के लिए अपनी बुनियादी समझ को विकसित करने में मदद करेगी।
एससीईआरटी ने दुनिया भर के अर्ली चाइल्डहुड प्रोग्राम का अध्ययन कर ‘खेल पिटारा’ किट तैयार किया है- अरविंद केजरीवाल
इस दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ईसीसीई किट (खेल पिटारा) बहुत शानदार है। एससीईआरटी ने देश और दुनिया भर में चल रहे अर्ली चाइल्डहुड प्रोग्राम का अध्ययन करने के बाद इस किट को तैयार किया है। इसमें कई तरह के लर्निंग मेटेरियल और खेलने के सामान दिए गए हैं। हमारा शुरू से सपना रहा है कि इस देश के हर बच्चे को समान शिक्षा मिलनी चाहिए। चाहे वो अमीर का बच्चा हो या गरीब का हो। अभी तक हमारे देश में दो तरह की शिक्षा प्रणाली चलती थी। अमीरों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में जाते थे और गरीबों के बच्चे सरकारी स्कूलों में जाते थे। सरकारी स्कूलों में पढाई खराब होती थी। इसलिए बड़ा होकर गरीब का बच्चा गरीब बनता था और अमीर का बच्चा अमीर बनता था। अमीर-गरीब के बीच यह खाई बढ़ती जाती थी।
अब दिल्ली सरकार के स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों के बीच अंतर नहीं रह गया है- अरविंद केजरीवाल
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में हमारी सरकार बनने के बाद हमने सारे सरकारी स्कूलों को शानदार बना दिया और उनमें शिक्षा का स्तर अच्छा किया। अब दिल्ली सरकार के स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों के बीच कोई अंतर नहीं रह गया है। बल्कि कई मां-बाप प्राइवेट स्कूलों से अपने बच्चों को निकाल कर सरकारी स्कूलों में भर्ती करा रहे हैं। दिल्ली सरकार के स्कूल छठीं कक्षा से शुरू होते हैं। इसलिए मन में आता था कि अगर हम एमसीडी जीत जाएं तो पांचवीं तक के स्कूल भी हमारे पास आ जाएंगे। उपर वाले ने हमारी सुन ली और हम एमसीडी भी जीत गए। अब पांचवीं तक प्राइमरी स्कूलों को ठीक करने का कार्यक्रम शुरू हो गया है।
आंगनवाड़ी वर्कर्स की भूमिका एक मां की तरह होती है- अरविंद केजरीवाल
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एमसीडी के पांचवीं तक के स्कूलों में पहली क्लास में दाखिला लेने वाले बच्चों को तैयार करने की जिम्मेदारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की है। आंगनवाड़ी में अक्सर गरीब लोग अपने बच्चों को भेजते हैं। जबकि अमीर लोग अर्ली चाइल्डहुड प्रोग्राम के लिए क्रेच में भेजते हैं। हम चाहते हैं कि इन दोनों के बीच के अंतर को भी खत्म करना चाहिए। हम आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले गरीबों के बच्चों को भी उसी तरह अर्ली चाइल्डहुड प्रोग्राम और वातावरण देना चाहते हैं, जो सबसे अच्छे प्राइवेट क्रेच में मिलता है। कहा जाता है कि कई बार बच्चे को जन्म देने वाली मां अलग होती है और उसे पालने वाली मां अलग होती है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका भी एक मां की तरह ही है। एक तीन साल का बच्चा आंगनवाड़ी कंेद्रों में कई घंटे बिताता है। इन बच्चों के मां-बाप बहुत ही गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं। गरीबी की वजह से उनके घर में बहुत तनाव रहता है। परिवार में झगड़े हैं, पड़ोसियों से झगड़े हैं। इसकी वजह से वो बच्चा भी बहुत तनाव में रहता है। लेकिन जब उस बच्चे को आंगनवाड़ी केंद्र में बहुत अच्छा माहौल मिलने लगे तो उसका बचपन और अच्छा बन सकता है।
आंगनवाड़ी को बच्चों को खिलाने व पोषण का केंद्र माना गया है, हम इस धारणा को बदलना चाहते हैं- अरविंद केजरीवाल
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर एक व्यक्ति की उम्र 100 साल है तो वो पूरी जिंदगी में जितना सीखता है, उसका 85 फीसद वो पहले 6 साल में सीखता है और बाकी 94 साल में वो व्यक्ति केवल 15 फीसद ही सीखता है। एक तरह से वो बच्चा कैसा बनेगा, इसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का बहुत बड़ा योगदान है। आंगनवाड़ी वर्कर्स एक बच्चे को नैतिक और मनोवैज्ञानिक मूल्यों के साथ बहुत सारी अच्छी चीजें सीखा सकती हैं। अभी तक आंगनवाड़ी केंद्रांे को बच्चों को खिलाने और पोषण का केंद्र माना गया है। हम इस धारणा को बदलना चाहते हैं। ये कंेद्र केवल खिलाने-पोषण का केंद्र नहीं होना चाहिए, बल्कि अर्ली चाइल्डहुड लर्निंग सेंटर भी होना चाहिए, जहां खेल के जरिए तरह-तरह की चीजें सिखाई जाएं और उसकी वैल्यू सिस्टम, इमोशनल और साइकोलॉजिकल की जरूरतों को पूरा किया जाए।
खेल पिटारा के जरिए आंगनवाड़ी वर्कर्स बच्चों को बहुत ही मनोरंजक तरीके से शिक्षा दे पाएंगी- अरविंद केजरीवाल
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इंजीनियरिंग के फाइनल इयर के बच्चों को पढ़ाने वाले प्रोफेसर का काम आसान है, जबकि तीन साल के बच्चे को पढ़ाने वाली आंनवाड़ी कार्यकत्रियों का काम ज्यादा मुश्किल है। इंजीनियरिंग के बच्चों को पढ़ाना आसान इसलिए है कि प्रोफेसर किताबें पढ़ लेता है और बोर्ड पर लिख देता है, लेकिन एक बच्चे की आत्मीयता के साथ परवरिश करना बहुत कठिन है। हम दिल्ली सरकार के स्कूलों के टीचर्स को ट्रेनिंग के लिए देश के बड़े-बड़े संस्थानों में भेजते हैं। हम आंगनवाड़ी केंद्रों के वर्कर्स को भी देश के बड़े-बड़े संस्थाओं में ट्रेनिंग के लिए भेजेंगी। दिल्ली सरकार के 11 हजार आंगनवाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों में करीब 1.75 बच्चे आते हैं। अगर ये बच्चे तीन साल केंद्र में रहते हैं तो हर साल 60 हजार बच्चे केंद्र से निकलते हैं और 60 हजार नए बच्चे आते हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि खेल पिटारा के जरिए आंगनवाड़ी वर्कर्स अब बच्चों को बहुत ही मनोरंजक तरीके से शिक्षा दे पाएंगी।
दिल्ली के सरकारी स्कूलों की तरह ही हमारे आंगनवाड़ी केंद्र भी देखने लोग आया करेंगे- अरविंद केजरीवाल
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब हमारी सरकार बनती थी, उस समय दिल्ली सरकार के शिक्षकों से 80 फीसद काम नॉन टीचिंग का लिया जाता था। टीचर्स से पढ़ाने का काम नहीं कराते थे। हमारी सरकार ने ये तय किया कि टीचर्स अब सिर्फ पढ़ाने का ही काम करेंगे, पढ़ाने के अलावा कोई काम नहीं करेंगे। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भी कई तरह के दूसरे काम कराए जाते हैं। मुझे लगता है कि टीचर्स की तरह आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भी सिर्फ बच्चों को पढ़ाने के अलावा कोई और काम नहीं लेना चाहिए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बच्चों के अलावा दूसरे जो काम कराए जाते हैं, वो दूसरों से कराया जाना चाहिए। ऐसे में ये बच्चों पर अधिक ध्यान दे पाएंगी। इस पर भी हम लोग विचार करेंगे। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बातचीत में देखते को मिला कि बच्चे प्राथमिकताओं में नहीं है, बल्कि दूसरे काम प्राथमिकताओं में हैं। हम समय-समय पर खेल पिटारा के प्रभाव का फीड बैक भी लेेंगे, ताकि अगर कोई सुधार करने की जरूरत है, उसमें सुधार किया जा सके। आज देश और दुनिया भर से लोग दिल्ली सरकार के स्कूल देखने के लिए आ रहे हैं। वो दिन भी जल्द आएगा, जब दुनिया भर से लोग हमारे आंगनवाड़ी केंद्र देखने के लिए आया करेंगे।
अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन किट बच्चों के सिखने के सिद्धांतों पर बना है कि वे किस प्रकार सिखना चाहते है- आतिशी
इस अवसर पर दिल्ली की महिला एवं बाल विकास मंत्री और शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि यह खेल पिटारा दुनिया भर में वर्ल्ड क्लास अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन की मिसाल बनेगा। हम अक्सर बच्चों के लिए महंगे खिलौने व किताबे खरीदते हैं, लेकिन उससे कई गुणा बेहतर गेम्स, टॉयज, पजल और किताबें अब हमारे 11 हज़ार आंगनवाड़ी केंद्रों में मौजूद होगी और लाखों बच्चे उसका फ़ायदा उठा सकेंगे और उससे सीख सकेंगे। जिस उम्र में बच्चा आंगनवाड़ी में आता है, वो उसके विकास के सबसे महत्वपूर्ण साल होते हैं। रिसर्च हमें यह बताती है कि बच्चों के ब्रेन का विकास 6 साल के उम्र तक होता है। इसलिए जो बच्चे हमारी आंगनवाड़ी में आ रहे हैं, वो आगे जाकर इंजीनियर, वैज्ञानिक, लेखक, वकील बनेंगे, यह तय करना आंगनवाड़ी वर्कर्स के हाथ में है। अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन किट बच्चों के सिखने के सिद्धांतों पर बना है कि बच्चे किस प्रकार से बड़ी बड़ी फोटो देखकर सिखना चाहते हैं, किस प्रकार से खेल कर सिखना चाहते हैं या गा कर सिखना चाहते हैं और किस प्रकार खिलौनों को छूकर सिखना चाहते हैं। अब बच्चों को मैथ्स की स्किल सिखाने के लिए दो और दो का प्रयोग नहीं करते बल्कि अपने क्रिएटिव आइडियाज से बच्चों को सिखाते हैं।
खेल पिटारा सिर्फ एक खिलौने नहीं, बल्कि देश के भविष्य को तराशने का एक तरीका है- आतिशी
उन्होंने कहा कि बच्चों की पहली शिक्षक उसकी मां होती है लेकिन बच्चों के लिए दूसरे मां आंगनवाड़ी वर्कर होती हैं। इसलिए आप सभी जब आंगनवाड़ी में जाएं, तब एक बात का जरुर ध्यान रखें कि जो बच्चे हमारे आंगनवाड़ी में आ रहे हैं जिन्हें आप सिखा रहीं हैं, खिला रहीं हैं, पढ़ा रहीं हैं, वो बच्चा इस देश का भविष्य है। इसलिए जो खेल पिटारा दिया जा रहा है, वो सिर्फ खिलौने नहीं है, बल्कि देश के भविष्य को तराशने का एक तरीका है। उन्होंने कहा कि जब आप बच्चों के साथ बैठ के मैथ्स के पजल सॉल्व करेंगे, उनके साथ खेलेंगे तो उनकी मैथ्स में रूची बढ़ेगी और क्या पता कि आपके आंगनवाड़ी से देश के भविष्य के ए.पी.जे अब्दुल कलाम और कल्पना चावला निकलें।
केंद्र में बच्चों को सिखाने व अच्छा भविष्य देने की ज़िम्मेदारी आंगनवाड़ी वर्कर्स के कंधों पर है- आतिशी
महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि पूरे देश को सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स से बहुत उम्मीद है। जो बच्चा हमारे आंगनवाड़ी में खेलने व पढ़ने आता है वो समाज के ऐसे तबके से आता है, जहां शायद उनके माता पिता उनकी शिक्षा में बहुत योगदान नहीं कर पाते हैं। बहुत सारे माता पिता सुबह से लेकर रात तक काम कर रहे होते हैं और बहुत सारे बच्चों के माता पिता को शायद पढना लिखना भी नहीं आता होगा। इसलिए इन बच्चों को सिखाने और अच्छा भविष्य देने की ज़िम्मेदारी आंगनवाड़ी वर्कर्स के कंधों पर है। मुझे पूरा भरोसा है कि जिस तरह से आज दिल्ली के स्कूलों का नाम पूरे देश और दुनिया भर में है और देश के अलग अलग हिस्सों से लोग हमारे स्कूलों को देखने आते हैं, वैसे ही भविष्य में अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन से सीखने के लिए देश और दुनिया भर से लोग दिल्ली की आंगनवाड़ी देखने आएंगे। सीएम अरविंद केजरीवाल का एक ही सपना है कि गरीब से गरीब बच्चे को भी वर्ल्ड क्लास शिक्षा मिले। मुझे ख़ुशी है कि दिल्ली में हम इस विज़न को पूरा करते हुए बच्चों को शानदार शिक्षा दे रहे हैं।
दिल्ली के आंगनवाड़ी केंद्रों में 1.7 लाख बच्चे ले रहे प्रारंभिक शिक्षा
तीन से छह साल केे उम्र के बच्चों में सीखने की एक मजबूत नींव रखना बहुत जरूरी होता है, ताकि संस्थागत परिवेश में उनको सीखने में आसानी रहे। दिल्ली में 3 से 6 आयु वर्ग के लगभग 1.7 लाख बच्चे 11 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक चाइल्ड केयर और शिक्षा (ईसीसीई) प्राप्त कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भी ईसीसीई को आजीवन सीखने की नींव के तौर पर मान्यता दी है। रिसर्च से पता चलता है कि छह साल की उम्र से पहले ही बच्चों का मस्तिष्क 85 फीसद से ज्यादा विकसित हो जाता है। बचपन के शुरूआती सालों में मस्तिष्क की उचित देखभाल और उत्तेजना के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, आगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को छोटे बच्चों और उनकी माताओं के टीकाकरण से लेकर पल्स पोलियो, पूरक पोषण वितरित करने से लेकर विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण करने तक 21 जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होता है।
7500 आंगनवाड़ी केंद्रों को मिल चुका है खेल पिटारा किट
इस तरह, कम उम्र के बच्चों को सीखने के लिए खेल आधारित दृष्टिकोण के महत्व और प्रभावशीलता पर विचार करते हुए एससीईआरटी ने एक शैक्षिक किट खेल पिटारा विकसित किया है। यह सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अपने केंद्र में बच्चों के भविष्य को आकार देने के लिए एक आकर्षक और प्रभावी उपकरण प्रदान करता है। 11 हजार अंगवंडियों में से अब तक करीब 7500 को मुख्यमंत्री के पत्र के साथ किट मिल चुकी है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बच्चों की सीखने की मजबूत नींव रखने की अपील की गई है। इस शैक्षिक किट के प्रभावी उपयोग के लिए पर्यवेक्षकों, सामुदायिक विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ), कुछ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित लगभग दो हजार मेटर प्रशिक्षकों को एससीईआरटी द्वारा प्रशिक्षित किया गया है।
खेल पिटारा में शामिल हैं खेल सामग्री, खिलौने और सरक्षरता संबंधी संसाधन
एससीईआरटी ने ईसीसीई किट खेल पिटारा विकसित की है। इसमें खेल सामग्री, खिलौने और साक्षरता संबंधित संसाधनों को शामिल किया गया है। इस किट को एससीईआरटी की समन्वयकों सहायक प्रोफेसर डॉ. मीना सहरावत और डॉ. रितिका डबास द्वारा डिजाइन किया गया। सहयोगी विकास टीम में एमसीडी, डीओई और दिल्ली के कुछ निजी स्कूलों के शिक्षकों के साथ-साथ एनजीओ भागीदार अहवान ट्रस्ट और रूम टू रीड भी शामिल थे। खेल पिटारा किट युवा शिक्षार्थियों के बीच समग्र विकास को बढ़ावा देने वाला एक कीमती उपकरण है। बच्चों को संज्ञानात्मक खेल, शारीरिक खेल और इंटरैक्टिव कहानी कहने जैसी विविध गतिविधियों में शामिल कर किट संज्ञानात्मक, शारीरिक, सामाजिक भावनात्मक और भाषा कौशल के विकास में मदद करती है, जो उनके समग्र विकास के लिए एक मजबूत नींव रखती है।
ये किट बच्चों में रचनात्मक, समास्या सुलझाने की क्षमता को बढ़ावा देती है
व्यावहारिक, इंटरैक्टिव और खोजपूर्ण खेल के जरिए किट बच्चों में रचनात्मकता, समस्या सुलझाने की क्षमता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देती है। इसके अलावा, जब बच्चे एक साथ खेलते हैं तो जो सामाजिक संपर्क और सहयोग होता है, वो साझाकरण, संचार और टीम वर्क जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कौशल के विकास में योगदान देता है। गिनती, छंटाई और आकार की पहचान जैसी बुनियादी गणितीय अवधारणाओं को पेश करने के लिए डिज़ाइन किए गए खिलौनों और खेलों का समावेश, भविष्य की गणितीय समझ के लिए आधार तैयार करता है। इसके अलावा, किट के अंदर विभिन्न खिलौने और जोड़-तोड़ ठीक और सकल मोटर कौशल के विकास में सहायता करते हैं, क्योंकि वे बेहतर हाथ-आंख समन्वय को बढ़ावा देते हैं।
स्टोरी कार्ड और किताबें भाषा व साक्षरता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती हैं
स्टोरी कार्ड और किताबें भाषा व साक्षरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बच्चों को कहानियों, पढ़ने और इंटरैक्टिव कहानी कहने के सेशन से परिचित कराकर किट उन्हें शब्दावली, समझ और शुरुआती पढ़ने के कौशल विकसित करने में मदद करती है। इसके अलावा, यह बच्चों को अपनी कहानियां बनाने, अपने विचार व्यक्त करने और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने की अनुमति देता है। विकासात्मक रूप से उपयुक्त खेल और सीखने की सामग्री के साथ एक सक्षम वातावरण बनाने से जिज्ञासा, कल्पनाशीलता को बढ़ावा मिलता है और भविष्य में सीखने के लिए एक मजबूत नींव तैयार होती है। खेल पिटारा-ईसीसीई किट के उद्देश्य प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मक कौशल के साथ अच्छी तरह से मेल खाते हैं, जिसका लक्ष्य बच्चों को ऐसे शिक्षार्थियों में शामिल करना है जो गंभीर रूप से सोचते हैं, सहयोग करते हैं, संवाद करते हैं और अपने मौजूदा वातावरण से जुड़ते हैं। ये किट बाल विकास के मूलभूत चरण का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
खेल पिटारा में ये सामग्री हैं शामिल
1. जोड़-तोड़: लेसिंग टूल, रेत और ट्रे, खेलने का आटा और उपकरण, अकारो की किट, जियोबोर्ड और रबर बैंड, कनेक्टिंग ब्लॉक, मोती और धागा, कनेक्टिंग स्ट्रॉ, नेस्टिंग खिलौने, फ्लेक्सी तार, बटनिंग और ज़िपिंग फ्रेम, और जंबो नट बोल्ट (निर्माण किट)।
2. विजुयल रिडिंग: कहानी की किताबें, स्पर्श कार्ड, कहानी कार्ड, पोस्टर, वर्णमाला पुस्तक और फ्लैशकार्ड।
3. मॉडल: खिलौना सेट, आवर्धक कांच, संगीत वाद्ययंत्र, कठपुतलियां और दो तरफा स्लेट।
4. पहेलियां और खेल: बिल्डिंग ब्लॉक, गेंदें, खेल उपकरण और जिग्सां पहेलियां।
5. स्टेशनरी: प्लास्टिक क्रेयॉन, ओरिगेमी शीट, पेंट ब्रश, बच्चों के अनुकूल कैंची, पोस्टर रंग, ग्लिटर ट्यूब और गुगली आंखें।
किट का मैनुअल हर सामग्री के उपयोग के लिए मार्गदर्शन देता है
किट में एक अतिरिक्त ईसीसीई मैनुअल है, जो प्रत्येक सामग्री के उपयोग पर व्यापक मार्गदर्शन प्रदान करता है। मैनुअल एक विषयगत दृष्टिकोण अपनाता है, विभिन्न विषयों को एकीकृत करता है और स्तर-वार प्रगति के पेश करता है। यह उन गतिविधियों की रूपरेखा पेश करता है जो सामग्रियों और संबंधित सीखने के परिणामों के साथ की जा सकती हैं। इसके अलावा, किट में प्रत्येक पुस्तक डिजिटल पहुंच की सुविधा के लिए एक क्यूआर कोड है। प्रत्येक किट की कीमत 8000 रुपए है। जून 2023 से यह किट एससीईआरटी द्वारा दिल्ली के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सभी 11 हजार आंगनवाड़ी केंद्रों में वितरित की जा रही है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें