अगर मैं प्रधानमंत्री होता
सरदार चरणजीत सिंह
भारत में 545 सांसद हैं।
अगर मैं प्रधानमंत्री होता
सरदार चरणजीत सिंह
भारत में 545 सांसद हैं।
मैं प्रधानमंत्री के रूप में प्रत्येक सांसद के क्षेत्र में लगभग 10 विधायक हैं।
मैं प्रधानमंत्री के रूप में प्रत्येक दिन प्रत्येक कलेक्टर और सांसद को साथ लेकर भारत के जिले का दौरा करता।
प्रत्येक वर्ष में 365 दिन होते हैं।
मोदी जी को प्रधानमंत्री बने हुए लगभग 9 वर्ष से अधिक हो गए हैं।
9 वर्षों में 356x365=3285 दिन होते हैं।
अगर मोदी जी देशभक्त समझदार अकलमंद भारत रक्षक प्रधानमंत्री होते तो 3285 दिनों में प्रधानमंत्री के रूप में लगभग 6 बार भारत के सभी सांसदों और कलेक्टरों के साथ दौरा कर चुके होते।
545 नए विश्वविद्यालय बन चुके होते।
545 हेलीकॉप्टर एयर एम्बूलेंस काम कर रही होती।
एक भी नागरिक के साथ अन्याय ना होता उसका जायज़ हक़ ना मारा जाता।
1947 से आज़तक भारत को एक भी नेक, ईमानदार, देशभक्त, समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाहन करने वाला प्रधानमंत्री नहीं मिला।
इसका कारण पता करने के लिए भारत के युवाओं को शोध करना चाहिए।
विदेश अंग्रेज या विदेशी लूटेरे आक्रांता तो मुट्ठी भर ही थे।
तो उन भारत के लुटेरों का साथ देने वाले कौन थे, वो किस लोक से आये थे, क्या भारत को लूटने वाले उन्हें अपने साथ लेकर आये थे।
वो देशद्रोही ग़द्दार कौन थे ? भारत के नागरिक उन्हें अभी तक क्यों नहीं पहचान पाए।
अगर मेरा प्रश्न सही नहीं है, तो विदेशों में रह रहे सभी भारतीय और भारत में रह रहे सभी भारतीय नागरिक मुझे दोषी ठहरा सकते हैं।
भारत के 2014 के पहले के प्रधानमंत्री अभी हमारे सामने हैं तो उनसे भी भारतियों का यही सवाल होना चाहिए और 2014 के बाद के प्रधानमंत्री जो जनता के टेक्स के तन, मन, धन, की कमाई से ट्रेजरी से सेलरी ले रहे हैं, जो स्वयं को भारतियों का चौकीदार और भारतियों का सेवक बोला करते थे ?
जो सभी भारतियों के कहते में 15 यूँ ही डलवाने की बात किया करते थे, जो डॉलर के मुक़ाबले रुपये की कीमत के घटने पर बड़े लम्बे लम्बे भाषण दिया करते थे, चीन और पकिस्तान को सबक सीखने की बात किया करते थे, महंगाई काम करने के दावे किया करते थे, करोड़ों नागरिकों को रोजगार देने की बात किया करते थे, पेट्रोल और रसोई गैस के दाम काम करने की बात किया करते थे, कोंग्रेसी सरकार की नाकामियों को भुनाया करते थे, भारत के सार्वजानिक उपक्रमों को शक्तिशाली करने की बात किया करते थे, सबका साथ सबका विकास, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, न्याय प्रक्रिया को दुरुस्त और भारत के सर्वांगीण विकास की बात किया करते थे, उन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंदर मोदी ने विदेशों की कितनी यात्रायें की और उन पर कितना भारत की जनता के टेक्स का पैसा खर्च हुआ, कितने अरब रूपये के विज्ञापन अपने चेहरे को चमकाने के लिए भारत की जनता के खरच कर डाले।
अगर सिर्फ भारत के सभी 545 संसदीय क्षेत्रों का दौरा कर लिया होता तो वास्तव में आज भारत विश्वगुरु बन चुका होता।
क्योंकि एक विश्विद्यालय एक शिक्षित समाज का निर्माण करता है।
और एक विश्विद्यालय में लगभग 50 हजार विद्यार्थी हर तीन से पांच वर्ष में तैयार होते हैं।
एक विश्विद्यालय से लगभग एक लाख लोगों को प्रतिवर्ष रोजगार प्राप्त होता है।
एक विश्वविद्यालय से 50 हजार विशेषज्ञ प्राप्त होते हैं।
प्रधानमंत्री जी यदि आप स्वयं शिक्षित होते तो आपको शिक्षा की विशेषता पता होती, प्र्धानमंरी जी अगर आप एक दाम्पत्य जीवन जी रहे होते तो आपको बेटी और बेटे और पत्नी, बहिन, भाई, माता, पिता समाज के प्रति सभी दायित्वों का आभास होता।
एक हजार साधु संतों से एक परिवार का वो मुखिया कर्तव्यशील होता है जो अपने सामाजिक कर्तव्यों का निर्वाहन करता है।
एक परिवार का मुखिया दुःख, सुख, सेहत हुआ समाज के गलत सिस्टम से टक्कर लेता हुआ, अपने विवाह से लेकर मृत्यु तक आपके बनाये हुए सिस्टम से अनेक प्रकार से आहात होकर भी अपने परिवार का भरण पोषण करता है।
और आप उस मजबूर और असहाय नागरिक के खून पसीने की कमाई से मौज करते चले जाते हो।
ना नागरिकों को जवाब देते हो, ना विपक्षियों को जवाब देते हो, ना मीडिआ को जवाब देते हो, किसी के भी दिल की या मन की बात नहीं सुनते हो बस अपने मन की बात सुनाते रहते हो।
और आपके अन्धभक्त गांधी के तीन बंदरों की तरह नो कुछ सुनते हैं, ना कुछ बोलते हैं, और ना कुछ उन्हें दिखाई देता है।
परन्तु क्या आप ये नहीं जानते की महा पराक्रमी रावण, महाराजा कंस, महावीर दुर्योधन, चंगेज खान, बाबर, हिटलर, सिकंदर, ओरंगजेब, इंदिरा गांधी कितनी शक्तिशाली थी ?
लेकिन हठधर्मिता का एक दिन अंत होता है।
काम शक्ति वाला गलती करता है तो उसका असर भी काम होता है।
अधिक शक्ति वाला गलती करे तो उसका प्रभाव भी अधिक होता है।
मेरे जैसा काम शक्ति वाला कोई अच्छा काम भी करेगा तो उसका असर काम ही होगा और आप जैसा अत्यधिक शक्ति वाल अगर गलती करेगा उसका परिणाम सदियों तक समस्त देश के नागरिकों को भुगतना पढ़ेगा।
आपके कुछ फैसले अच्छे भी हैं लेकिन आपके अधिकतर फैसले समस्त जनहित में नहीं हैं।
भारत का कनून कहता है चाहे अनेक अपराधी बच जाएँ लेकिन एक भी बेक़सूर के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, लेकिन आपके प्रसाशन में बेकसूरों को ही सजा हो रही है, सारे कसूरवार आपकी सरकार में या आपकी पार्टी में जाते ही निर्दोष करार कर दिए जाते हैं।
आप केवल भारत की जनता के ही नहीं प्रकृति, कुदरत, वनस्पति को भी जवाबदेह हैं, इसलिए आपके पास 2024 के चुनाव से पहले अब केवल कुछ महीने ही बचे हैं जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए।
आप दोबार प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं यह तो भविष्य की गॉड में ही है, लेकिन आप जितने दिन प्रधानमंत्री हैं कम से कम उतने दिन अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं।
आप शिक्षित हों या ना हों लेकिन अनुभवी तो हैं, तो अपने अनुभव के आधार पर सभी भारतियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के फैसे लेकर परम पिता परमेश्वर के दरबार में सम्मान से खड़े होने के काम करके जनता और भगवान् का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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