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सोमवार, 9 मई 2022

हिन्दू अन्ना तुरुक काणा दोना नालो ज्ञानी सियाणा #Hinduismfalseandtrue

हिन्दू अन्ना तुरुक काणा दोना नालो ज्ञानी सियाणा #Hinduismfalseandtrue https://youtu.be/jA5x-z0pKu4 हिन्दू अन्ना, तुरुक काणा, दोना नालो ज्ञानी सियाणा।
वैचारिक-अंधता का अंत मानवता से। नए जन्मे बच्चे को हिन्दू नाई ने बनाया या भगवान् ने ? हिन्दू को अन्धा और तुर्क को काणा क्यों कहा गया है ? अँधा उसे कहा जाता है जो आँखों से देख ना सके ! और जो देखकर भी ना देखे उसे सर्वस्व अँधा कहा जाता है। पूरा लेख पढ़कर और विडिओ देखकर सम्मान और स्वाभिमान के साथ अपने विचार रखें, विचार रखने की लिए सभी का स्वागत है। याद रहे सिख एक स्वतंत्र धर्म है। भगवान् परशुराम केशधारी सिख थे। नेत्रहीन होना कोई अपराध नहीं, परन्तु जो देखकर भी नहीं देखता वो अपराधी होता है, कानून भी, अपराध करते हुए, अपराधी को देखने वाले को, तब अपराधी मानता है, जब वह देखकर भी अनदेखा करता है, इसका असर ये होता है कि अपराधी शक्तिशाली हो जाता है, क्योंकि उसके अपराध का किसी ने भी विरोध नहीं किया, इसी लिए अपराधी स्वछन्द अपराध करता जाता है, और एक दिन वो नेता बन जाता है, और नेता बन कर बढ़े अपराध करता जाता है। हिन्दू कोई धर्म नहीं है, एक स्थान का नाम धर्म कैसे हो सकता है, हिन्द देश में, रहने वाले, अपने नाम के साथ, हिन्द निवासी लगा सकते हैं, लेकिन हिन्द कोई धर्म नहीं, हर व्यक्ति, अपनी पहचान के लिए, अपने नाम के साथ, अपने ग्राम या कस्बे यां शहर का नाम लगता है, तो क्या स्थान का नाम, धर्म हो जाता है ? धर्म का निर्णायक अर्थ कर्तव्य परायणता होता है। कुदरत, प्रकृति, वनस्पति, इंसानियत, मानवता, समानता, का पालन करना ही धर्म है। ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ हिन्दी भावार्थ: सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी का जीवन मंगलमय बनें और कोई भी दुःख का भागी न बने। हे भगवन हमें ऐसा वर दो! सभी लिखा है, हिन्दू नहीं ! सभी के सुख के लिए, सिख जीते मरते हैं हिन्दू नहीं। उपरोक्त पध में यह नहीं लिखा ! हिन्दू सुखी होवें, हिन्दू रोगमुक्त रहें, हिन्दू का जीवन मंगलमय बनें और हिन्दू भी दुःख का भागी न बने। हे भगवन हमें ऐसा वर दो! यदि यह लिखा होता तो सभी को मान्य होता। धर्म सभी के लिए सुख मांगने का नाम है। नफरत के बीज बोने के लिए नहीं। जो आज का अंधा हिन्दू नफरत के बीज बो रहा है। सभी की भलाई में ही धर्म है, अन्यथा सब अधर्म है। प्रस्तुति लेखक सरदार चरणजीत सिंह सिख खालसा 9213247209

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