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सोमवार, 10 नवंबर 2025

चुनावी साजिशों का खौफनाक सिलसिला: भाजपा शासन में दिल्ली ब्लास्ट से पूर्व की साजिशें सरदार चरणजीत सिंह

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चुनावी साजिशों का खौफनाक सिलसिला: भाजपा शासन में दिल्ली ब्लास्ट से पूर्व की साजिशें
सरदार चरणजीत सिंह
नई दिल्ली, १० नवम्बर २०२५ (रुस्तम-ए-हिन्द संवाददाता): दिल्ली के लाल किले के निकट रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के गेट नम्बर १ के पास सोमवार शाम को हुए भयंकर कार बम विस्फोट ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है।
इस विस्फोट में कम से कम आठ निर्दोष लोगों की मौत हो गई, जबकि २४ से अधिक घायल बताए जा रहे हैं।
आग की लपटों ने आसपास की कई गाड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया, और विस्फोट की तीव्रता इतनी थी कि सड़क के आसपास के स्ट्रीट लाइट टूटकर बिखर गए।
दिल्ली पुलिस, एनआईए और एनएसजी की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन सवाल उठ रहे हैं—जब केंद्र में भाजपा सरकार है, राज्य में भाजपा शासन है, आरएसएस का पूरा समर्थन है, सीबीआई, आरओ, एनएसए, एनआईए, इंटेलिजेंस एजेंसियां और दिल्ली पुलिस सब भाजपा के अधीन हैं, तो यह सुरक्षा चूक कैसे हुई? क्या यह महज 'फेलियर' है, या चुनावी साजिश का हिस्सा?
यह घटना बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक पहले घटी है, जहां 'चोट चोर गद्दी छोड़' आंदोलन और पंजाब में चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में चल रहे छात्र आंदोलन ने भाजपा को बैकफुट पर धकेल दिया है।
विपक्ष के नेताओं का आरोप है कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, और इतिहास इसका साक्षी है।
गुजरात कांड से लेकर पुलवामा तक, हर बार सत्ता पक्ष ने ऐसी घटनाओं का लाभ उठाया है।
क्या दिल्ली ब्लास्ट भी इसी सिलसिले का हिस्सा है? रुस्तम-ए-हिन्द की विशेष रिपोर्ट में हम ऐसे ही प्रमुख उदाहरणों का विश्लेषण कर रहे हैं, जो दर्शाते हैं कि चुनावों से पहले हुई हिंसा, हत्याओं और दुर्घटनाओं का पैटर्न कैसे सत्ता के हितों से जुड़ा रहा है।
दिल्ली ब्लास्ट: सुरक्षा की पोल खुली या साजिश की शुरुआत?
सोमवार शाम करीब ६:५५ बजे रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के गेट नम्बर १ के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार में विस्फोट हुआ।
दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार, सात फायर टेंडर और १५ एम्बुलेंस मौके पर भेजी गईं।
एलएनजेपी अस्पताल में आठ शव लाए गए, जबकि कई घायलों की हालत गंभीर है। प्रत्यक्षदर्शी संजय भार्गव, चांदनी चौक व्यापार मंडल के अध्यक्ष, ने बताया, "विस्फोट इतना जोरदार था कि ७००-९०० मीटर दूर तक कंपन महसूस हुआ, मानो भूकंप आ गया हो।"
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कार में अमोनियम नाइट्रेट जैसा ज्वलनशील पदार्थ था, जो रविवार को हरियाणा में गिरफ्तार एक कश्मीरी डॉक्टर के पास बरामद सामग्री से मिलता-जुलता है।
प्रधानमंत्री ने स्थिति की समीक्षा की, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस प्रमुख से बात की। लेकिन विपक्ष पूछ रहा है—जब सभी सशस्त्र बल और एजेंसियां भाजपा के नियंत्रण में हैं, तो यह 'इंटेलिजेंस फेलियर' कैसे?
क्या यह 'चोट चोर' आंदोलन को कुचलने और बिहार-पंजाब में विपक्षी लहर को दबाने की साजिश है?
एनआईए ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसी घटनाओं की सच्चाई कभी सामने नहीं आती।
गुजरात दंगों से लेकर संसद हमले तक, जांचें हमेशा अधर में लटक जाती हैं।
चुनाव पूर्व हिंसा का काला इतिहास: साजिशों के प्रमुख उदाहरण
भारत के लोकतंत्र में चुनाव हमेशा से साजिशों का शिकार रहे हैं।
भाजपा शासनकाल में यह पैटर्न और स्पष्ट हो गया है।
नीचे कुछ प्रमुख उदाहरण दिए गए हैं, जहां हमलों, हत्याओं और 'दुर्घटनाओं' ने सत्ता पक्ष को चुनावी लाभ पहुंचाया:
घटना तिथि स्थान विवरण चुनावी संदर्भ परिणाम राजीव गांधी हत्या २१ मई १९९१ तमिलनाडु (श्रीपेरंबुदूर) एलटीटीई की सुसाइड बॉम्बर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की।
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान।कांग्रेस को सहानुभूति वोट मिले, लेकिन भाजपा ने बाद में इसका राजनीतिकरण किया।
जांच अधूरी रही।
गुजरात दंगे २००२ (फरवरी-मार्च) गुजरात गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद मुसलमानों पर हमले; १०००+ मौतें।
गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले।
नरेंद्र मोदी की छवि 'मजबूत नेता' बनी; भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया। एसआईटी जांच में मोदी को क्लीन चिट, लेकिन सवाल बाकी।
संसद हमला १३ दिसम्बर २००१ नई दिल्ली जैश-ए-मोहम्मद के ५ आतंकियों ने संसद पर हमला; ९ मौतें।
गुजरात चुनाव से पहले तनाव बढ़ाने के लिए।
भारत-पाक युद्ध की धमकी; गुजरात में भाजपा को 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा मिला।
अफजल गुरु को फांसी, लेकिन साजिश की परतें अनुत्तीर्ण।
पुलवामा हमला १४ फरवरी २०१९ जम्मू-कश्मीर सुसाइड बॉम्बर ने सीआरपीएफ काफिले पर हमला; ४० जवान शहीद।
लोकसभा चुनाव से ४० दिन पहले।बालाकोट एयर स्ट्राइक; भाजपा को 'राष्ट्रीय सुरक्षा' पर वोट मिले।
एनआईए जांच में पाकिस्तान का हाथ, लेकिन आंतरिक साजिश के आरोप।पहलगाम हमला २२ अप्रैल २०२५ जम्मू-कश्मीर (पहलगाम) द रेसिस्टेंस फ्रंट (एलटीई प्रॉक्सी) ने हिंदू पर्यटकों पर हमला; २६ मौतें।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले।
अनुच्छेद ३७० हटाने के बाद पहला बड़ा हमला; भाजपा ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया।
सिंधु जल संधि निलंबित, लेकिन विपक्ष ने 'इंटेलिजेंस फेल' का आरोप लगाया।उड़ी हमला १८ सितम्बर २०१६ जम्मू-कश्मीर पाक-आधारित आतंकियों ने आर्मी बेस पर हमला; १९ जवान शहीद।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले।
सर्जिकल स्ट्राइक; भाजपा को 'मजबूत' इमेज मिली।
जांच में पाकिस्तान का हाथ, लेकिन सुरक्षा चूक पर सवाल।
ये उदाहरण दर्शाते हैं कि चुनाव पूर्व हिंसा अक्सर सत्ता पक्ष के पक्ष में जाती है। २०१९ लोकसभा चुनाव से पहले पुलवामा ने भाजपा को ३०३ सीटें दिलाईं, जबकि २००२ गुजरात दंगों ने मोदी को मुख्यमंत्री पद पर बिठाया।
इसी तरह, १९९१ राजीव हत्या ने कांग्रेस को लाभ पहुंचाया, लेकिन भाजपा ने बाद में इसका राजनीतिकरण किया।
भाजपा की साजिशें: साबित इतिहास या सियासी आरोप?
भाजपा पर कई बार चुनावी साजिशों का आरोप लगा है। २००८ मुंबई हमलों के दौरान भाजपा ने विज्ञापनों में 'फाइट टेरर, वोट भाजपा' का नारा दिया, जबकि हमले के दौरान यूपीए सरकार पर हमला बोला।
पुलवामा के बाद भी 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा उठाकर वोट बटोरे।
विपक्ष का कहना है कि दिल्ली ब्लास्ट भी इसी चक्रव्यूह का हिस्सा है—'चोट चोर' आंदोलन को दबाने के लिए।
पूर्व में हरियाणा में ३०० किलो विस्फोटक बरामद हुए थे, जो इस ब्लास्ट से जुड़े हो सकते हैं।
लेकिन सवाल यह है: अगर सभी एजेंसियां भाजपा की हैं, तो फेलियर क्यों?
क्या जनता को कभी सच्चाई पता चलेगी?
गुजरात कांड की एसआईटी रिपोर्ट से लेकर पुलवामा एनआईए जांच तक, सच्चाई दबा दी जाती है।
जनता का क्या भाग्य? भूलने की बीमारी या न्याय की मांग?
इस भयंकर ब्लास्ट के बाद जनता क्या करे?
किसे दोषी ठहराए?
भाजपा सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया है, लेकिन मुंबई, लखनऊ जैसे शहरों में भी सतर्कता बरती जा रही है।
विपक्षी नेता राहुल गांधी ने कहा, "यह सुरक्षा की नाकामी नहीं, साजिश है। जनता जागे, वरना इतिहास दोहराया जाएगा।"
रुस्तम-ए-हिन्द अपील करता है: जनता को एकजुट होकर न्याय की मांग करनी चाहिए।
चुनावी साजिशें लोकतंत्र का गला घोंट रही हैं।
क्या यह ब्लास्ट भी भुला दिया जाएगा, या जनता का गुस्सा सत्ता को झुकाएगा? समय ही बताएगा, लेकिन इतिहास चेतावनी दे रहा है—साजिशें रुकेंगी नहीं, जब तक जनता न जागे।
(रुस्तम-ए-हिन्द की यह रिपोर्ट ऐतिहासिक तथ्यों और समाचार स्रोतों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें।)

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