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मंगलवार, 14 नवंबर 2023

बहिष्कृत भारतीय हिन्दू कितना लज्जित नाम है सरदार चरणजीत सिंह

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बहिष्कृत भारतीय हिन्दू कितना लज्जित नाम है
सरदार चरणजीत सिंह
जिसे अपनाने का फैसला भारत के संविधान निर्माता
बाबा साहिब आंबेडकर ने सहर्ष त्याग दिया था



मोहनदास करम चंद्र गांधी सदा हर्जाना की आजादी का विरोध करता रहा।
तब भी आज भी अछूतों को आजादी से 77 वर्ष के बाद
तथाकथित हिन्दू मंदिरों में जाने की इजाजत नहीं।
क्यों बाबा साहिब आंबेडकर की मांग के अनुसार किसी अछूत को
को तथाकथित हिन्दू धर्म ने 77 वर्षों बाद भी शंकराचार्य नहीं बनाया।
बाबा साहिब आंबेडकर तथाकथित हिन्दुओं के सदियों पुराने अत्याचारों के चलते
हिन्दू धर्म छोड़कर बुद्ध धर्म को अपना लिया।
बाबा साहिब आंबेडकर ने दृढ़ता से कहा की वह पैदा तो हिन्दुओं द्वारा सदा से अपेक्षित
महार जाती में पैदा हुए थे, लेकिन वह मारेंगें बौधिस्ट बनकर।
भारत का सबसे अधिक शिक्षित महान व्यक्ति ने बुद्ध धम्म अपना लिया।
क्योंकि वह हिन्दू धर्म को घ्रणित असमानता का सिद्धान्त देने वाला मानते थे।
बाबा साहिब के बाद भी वर्तमान में भी हरिजन समाज भारत में पूरी तरह से अपेक्षित है।
अति पिछड़ा - पिछड़ा वर्ग, आदिवासी वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग भी वर्तमान में तथाकथित हिन्दुओं द्वारा सभी प्रकार से दूषित घृणा और सामाजिक अत्याचार का कारन बना हुआ है।
वर्तमान में भी भारत में ब्राह्मणो ने न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिआ पर कब्जा कर रखा है।
बाबा साहिब भीमराव आंबेडकर साहिब ने अपनी जीवन कथा में बताया है की उनके बचपन में उनके पिता के मित्र ने उन्हें बौद्ध धम्म से जुड़ी एक पुस्तक दी थी जिसके कारण वो बौद्ध धम्म की तरफ आकर्षित थे।
असल में जब बाबासाहब भीमराव आंबेडकर सभी धर्मों का अध्यन्न कर रहे थे तब ईसाई भी उनसे इसे धरम अपनाने के लिए कहने गए थे, हिन्दू भी गए थे, सिक्ख भी गए थे।
लेकिन मोहनदास करम गाँधी जिसे बाबा साहिब एक धूर्त राजनैतिक मानते थे, उनका मानना था मोहन दस करम चंद्र गांधी निजी लाभ के लिए सत्याग्रह कर के भारत में असमानता का बीज बो रहे थे।
बाबा साहिब आंबेडकर जिस प्रकार से भारत से असमानता मिटाना कहते थे मोहनदास गांधी ने उनमें बहुत अधिक व्यवधान पैदा किया।
विभाजन भी मोहनदास करम चंद्र गांधी की विफलता का एक कारण था।
अपने आप को अहिंसक कहने वाला नौटंकीबाज़ मोहनदास करमचंद्र गाँधी वर्तमान परिद्रश्य को देसखकर भारत में सभी प्रकार की जातिगत हत्याओं और आर्थिक कमजोरी का सबसे अधिक जिम्मेदार दीखता है।
भीम राव बाबा साहिब अत्यंत शिक्षित दूरदर्शी महँ पुरुष थे दुसरी तरह गांधी केवल एक नौटंकीबाज़ था, कहते हैं लम्हों ने खता की सदियों ने सज़ा पायी।
गांधी हमारे देश भारत के लिए वही खता थी जिसकी सज़ा सभी भारत वासी अब भी पा रहे हैं।
अगर अब भी नकली नौटंकी के गांधीवाद को भारत से समाप्त नहीं किया गया तो आगे भविष्य में भी भारत नोयंकीबाज़ गांधी के कुचक्र से नहीं निकल पायेगा।
गुरु ग्रंथ साहिब जी की अपार महानता पर सारे संसार को अत्यंत गर्व है।
हमें सिखों को अत्यंत गर्व  है कि हम सिख पंथ में पैदा हुए हैं।
गुरु नानक साहिब और उनके बाद बाकि नो गुरु, गुरु अंगद साहिब, गुरु अमरदास साहिब, गुरु रामदास साहिब, गुरु अर्जुन साहिब, गुरु हरगोबिंद, गुरु हरिराय साहिब, गुरु हरिकृष्ण साहिब, गुरु तेगबहादुर, गुरु गोबिंद सिंह साहिब और अंत में सबद गुरु गुरु ग्रन्थ साहिब जी को सिख अपना गुरु मानते हैं।
गुरु ग्रन्थ साहिब अक्षरों से निर्मित सबद और शब्दों से निर्मित वाक्यों, गद्दों-पद्यों द्वारा समस्त विश्व के जीवों को बिलकुल बराबर का अधिकार देते हैं, सबद विचारों से बनते हैं, और प्रकृति, कुदरत, वनस्पति सदा से सत्य है।
सत्य सिद्धांत सभी के लिए समान लाभकारी होते हैं।
बाबा साहिब भी सिख धर्म अपनाना चाहते थे यहां भी मोहनदास करम चंद्र गांधी ने समाज के साथ गद्दारी की।
भीमराव बाबा साहिब आंबेडकर को सिख धर्म नहीं अपनाने दिया।
मोहनदास करम चंद्र गांधी का ये मानना था अगर बाबा साहिब भीमराव आंबेडकर सिख धर्म अपना लिए तो सभी जनजाति, अनुसूचित जनजाति, घूमंत्रु आदिवासी आदि सभी सिख धर्म अपना लेंगे और ब्राह्मणो का आडंबरों और भ्रम का धंधा बंद हो जाएगा और उन सभी को मेहनत करके काम करके खाना पढ़ेगा इसी लिए मोहनदास करम चंद्र गांधी ने भीमराव बाबा साहिब आंबेडकर को सिख धर्म नहीं अपनाने दिया।
और किसी को बाबा साहिब भीम राव जैसा शिक्षित भी नहीं होने दिया, बहुसंख्यं मूल निवासियों को सदा भरम में रखने का कुचक्र चलाये रखने की विधि जारी राखी इसी लिए बाबा साहिब भीमराव आंबेडकर जैसे महान संविधान निर्माता के संविधान के जारी होने के 77 वर्षों बाद भी आज भी भारत की 97 प्रतिशत शक्ति ब्राह्मणो के पास है और 3 प्रतिशत शक्ति 97 प्रतिशत के पास है।
अगर बाबा साहिब भीमराव आंबेडकर सिख धर्म अपना लेते तो भारत के सभी नागरिकों को किअभी के सामान अधिकार प्राप्त हो चुके होते।
अभी भी देर नहीं हुयी है अगर आज भी ब्रामणवादी मोहनदास करम चंद्र गांधी के कुचक्र को भारत की बहुसंख्यक जनता समझ ले तो बहुत अधिक जल्दी भारत में समानता का राज आ सकता है। 

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