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मंगलवार, 29 अगस्त 2023

यारियां 2 फिल्म बनाने वाले संसार के सबसे बड़े हरामी। चरणजीत सिंह

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फ्रंट पेज
यारियां 2 फिल्म बनाने वाले संसार के सबसे बड़े हरामी।
चरणजीत सिंह
हरामी का मतलब होता है जो हरामखोर हो, यानी की खाकर हराम करने वाला।
और एक हरामी होता है जिसके बाप का ना पता हो।
विनय सप्रू और राधिकार राव और कृष्ण कुमार और आयुष माहेश्वरी के लिए अनंत गलियों की एक गली बनाई जाए और ऐसी अनत गलियां यारियां 2 फिल्म के निर्माता और निर्देशक और कलाकारों, लेखकों, कैमरामेन इत्यादी को दी जाएँ तो वो भी अत्यन्त कम हैं।
टी सीरीज का मालिक आर एस एस का पालतू कुत्ता, जिसके सारे के सारे खानदान को जो कीड़े कुत्तों को पढ़े होते हैं वो पढ़े हुए हैं।
और इनकी सारी टीम के सभी सदस्यों और सेंसर बोर्ड के आँखों से अंधे, दिमाग से गन्दगी के ढेर जिनके भ्रूण तक में भी जीबी रोड़ और भारत के सभी रेड लाईट एरिया के दलालों का गंदा खून मिला हुआ है।
इसके आलावा दिव्या खोसला कुमार, यश दासगुप्ता, मिजान जाफरी, पर्ल पुरी, अनास्वरा राजन, वरीना हुसैन और प्रिया प्रकाश वरियर भी उपरोक्त लिस्ट में शामिल हैं।
इस घिनौनी गंदी से गंदी टीम ने इस फिल्म में एक गंदगी के ढेर को जिसे ये हीरो कह रहे हैं, उसके गले में खालसा पंथ की शान, बान, आन गात्रा और श्री साहिब पहना रखी है।
जिसे बाल कटा भी दिखाया गया है।
जिसकी हीरोइन को सिगरेट पीते भी दिखाया गया है।
सिख समुदाय को ना इस फिल्म से कोई मतलब है ना इसके निर्माता, निर्देशक से ना इसके कलाकारों से, ना इसके फाइनेंसरों से ना सेन्सट बोर्ड में बैठे निकम्मों से।
खालसा पंथ को मतलब है अपनी पवित्रता से, अपनी आन, बान, शान से जिसे प्यूरी तरह से नष्ट करने का घिनोना नाकाम प्रयास किया गया है।
पहले तो लेखक की हिम्मत कैसे हुयी, फिर निर्माता निर्देशक की फिल्म बनाने की हिम्मत कैसे हुयी, फिर कलाकारों की हिम्मत कैसे हुयी इस तरह के कुकृत्य को फ़िल्मकार प्रदर्शित करने की।
ये फिल्म इंसानियत, मानवता, कुदरत, प्रकृति और 100 प्रतिशत शुद्ध खालसाई पर कुला सरकारी हमला है।
जिसमें अनेक हरामखोरों को मोहरा बनाया गया है।
जिनका खुद का कोई चरित्र नहीं उन्हें खालसा पंथ की पवित्रता भी रास नहीं आ रही।
अगर इस फिल्म को पूरी तरह बंद करके सभी जिम्मेदारों को सख्त से सख्त सजा नहीं दी गयी, तब तक हम गुरुद्वारा हरी सिंह नलुआ सिंह सभा कमेटी के माध्यम से जंतर मंतर पर बेमियादी धरना देंगे।
खास तोर पर भारत सरकार के फिल्म प्रभाग को पूरी तरह से बदला नहीं गया और फिल्म से जुड़े हर एक को सख्त से सख्त सजा नहीं दी गयी तो सिख समुदाय टी सीरीज और टी सीरीज से जुड़े हर एक संस्थान और प्रभाग को प्यूरी तरह से बंद करने की मांग करेगी।
हमारे शब्दों का प्रयोग पाठकों को शायद अच्छा ना लगे, लेकिन अगर कोई हरामखोर संसार के सबसे प्रतिष्ठित और शुद्ध समाज को, समाज की पीढ़ियों को नष्ट करने का घिनोना प्रयास करेगा, तो बुरे शब्द तो इनके लिए बहु कम हैं, इन सभी को तो चौराहे पर खड़ेकर के गोली मार देनी चाहिए।
अपराध की सजा होती है, लेकिन पीढ़ियों को बर्बाद करने की सजा नहीं, भयंकर सजा होती है।

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