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शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2021



अब हम अगर ख़ालिस्तान मांगते हैं तो उसका जिम्मेदार आरएसएस भाजपा और मोदी सरकार है।

पंजाब हजारों वर्षों से भारत देश को बचता आया है।

साढ़े पांच सौ साल पहले बाबर की सरकार को और बाबर को गुरु नानक देव जी ने जॉबर कहा था।

उसी बाबर के वंशज के नाम पर बाबरी मस्जिद बनाई गयी थी।

उसी बाबर के वंशज जहाँगीर ने ग्वालियर के किले में सैकड़ों हिन्दू राजाओं को बन्दी बना रखा था।

उन बंदियों को सिखों के छ्ठे गुरु हरिगोबिन्द देव जी ने दीपावली से कुछ दिन पहले नपुंसक नमकहराम देशद्रोही गद्दार हिन्दू राजाओं को रिहा करवाया था।

उसी बाबर का वंशज ओरंगजेब सवा मन जेनयू प्रतिदिन जबरदस्ती उतार कर यानि की नपुंसक नमकहराम देशद्रोही गद्दार हिन्दुओं को मुसलमान बनाकर रात का खाना खाता था।

सिखों के नौवें गुरु तेगबहादुर जी ने अपना सीस देकर नपुंसक नमकहराम देशद्रोही गद्दार हिन्दुओं की तब रक्षा की थी।

उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने दो पुत्रों को हिन्दू राजाओं की नपुंसक नमकहराम देशद्रोही गद्दार सोच रखने वाले गद्दार राजाओं की गद्दारी के कारण अपने दो नवयुवक बच्चों बाबा अजित सिंह और बाबा जुझार सिंह जी के साथ हजारों देशभक्त सिखों को शहीद करवाया।

गद्दार गंगू ब्रह्मण और सुच्चानन्द की गद्दारी के कारण दो साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फ़तिह सिंह को जिन्दा ही दीवारों में चुनवाया।

तब गुरु गोबिंद सिंह जी पंजाब के लुधियाना के पास रायकोट में थे जब उन्हें इस इस अन्यायपूर्ण क्रूरता की ख़बर मिली तब जन्द नाम के पेड़ को गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने तीर से उखाड़कर कहा था की अब मुस्लिम राज की जड़ उखाड़ दी गयी है।

उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह जी ने माधो दास बैरागी को बंदा सिंह बहादुर बना कर पाँच अजीत तीर देकर पंजाब भेजा था।

सरहन्द के वजीर खान को तब बाबा बंदा सिंह बहादुर जी ने समूल नष्ट कर दिया था।

उसके बाद हिन्दुओं की गद्दारी के कारण भारत पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था।

इन अंग्रेजों को भी खालसा राजा महाराज रणजीत सिंह ने कभी पंजाब पर कब्जा नहीं करने दिया।

और जिस काबुल कंधार पर अमेरिका भी कब्जा नहीं कर पाया उस अफगानिस्तान पर भी खालसा हरी सिंह नलुआ का राज था।

ब्रिटश राज को भी उखाड़ने में भी सबसे अधिक कुर्बानियां खालसा और सिखों और पंजाबियों ने दी थी।

1932 में अंग्रेजों के पास तीन देशों पकिस्तान, खालिस्तान, हिन्दुस्तान तीन देशों का प्रस्ताव पास किया गया था।

लेकिन उस समय के सिख लीडरों की अदूरदर्शिता और गाँधी नेहरू की गद्दारी के कारण खालिस्तान नहीं बन सका।

पंजाब के तीन बढ़े टुकड़े कर दिए गए।

एक पंजाब पकिस्तान में, एक पंजाब अफगानिस्तान, एक पंजाब हिंदुस्तान में चला गया।

गाँधी नेहरू जिन्ना और उस समय के हिन्दू गद्दारों और भोले खालसा सिख लीडरों की अदूरदर्शिता ने पंजाब की सबसे बढ़ी शक्ति को तीन भागों में बाँट दिया गया।

लाखों लोगों को वीभत्स ढंग से लूटा खसोटा मारा गया महिलाओं बच्चियों के बलात्कार किये गए।

सबसे अधिक नुक्सान पंजाब की जनता का हुआ।

दोने तरफ से देशभक्त पंजाबी ही मरे गए, चाहे वो मुस्लिम पंजाबी थे चाहे सिख हिन्दू पंजाबी।

गद्दार बचा रहा।

इस त्रासदी के बाद गोडसे ने गांधी को इस लिए मार दिया की गाँधी ने मुस्लिमों को भारत से जाने को नहीं कहा।

पंजाबियों की सामूहिक हत्याओं में उस समय की सरकार और आरएसएस वालों का हाथ था।

गाँधी को गोडसे ने गोली मारी थी।

तब आरएसएस के हिन्दुओं का सामूहिक कत्लेआम नहीं हुआ था।

उसके बाद देश के पहले गद्दार नेहरू का राज आया।

नेहरू ने खालसा द्वारा अपना हक़ मांगने पर ख़ालसा, सिखों, पंजाबियों को जबरदस्ती गैरकानूनी असवैधानिक ढंग से हिंसक प्रवित्ति से परेशान करना आरम्भ कर दिया।

हिन्दुस्तान के बचे हुए पंजाब जैसे समृद्ध राज के भी तीन टुकड़े कर दिए।

उसके बाद से ही भारत सरकार ने खालसा, सिखों, पंजाबियों पर जुल्म करना आरम्भ कर दिया था।

चाहे 1947 की कबीलियों से जंग हो, चाहे 1962 की पकिस्तान से जंग, चाहे 1972 की जंग हो हर जंग में खालसा और सिखों और पंजाबियों ने ही जंग जितायी।

लेकिन आरएसएस और कांग्रेस खालसा शक्ति को समाप्त करने के लिए पंजाब में डेरावाद, निरंकारी, राधास्वामी, आशुतोष, गुरमीत राम रहीम को पंजाबियत की शक्ति को समाप्त करने के लिए हर गैर जरूरी मदद करती रही।

सिखों के सबसे बढ़े मंदिर अमृतसर स्थित हरिमन्दिर साहिब पर पहला हमला नेहरू ने 1952 में करवाया था।

पंजाबी सूबे के दिल्ली मोर्चे पर जो लालकिले के सामने हुआ था नेहरू ने टेंटों की रस्सियां कटवाकर मोर्चे पर बैठे खालसा और सिखों पंजाबियों पर घोड़े चढ़वादिये थे।

पंजाब अपनी मांगे मांगता रहा और भारत सरकार अत्याचार करती रही, पंजाब शांति से अपनी मांगे मानता रहा, भारत सरकार अधर्मिता अलोकतांत्रिक नमकहरामी से देश के सबसे शक्तिशाली देशभक्त ईमानदार पंजाब को रोंदती रही।

पंजाब में बेअंत सिंह जैसे गद्दार ने भी और केपीएस गिल, रिबेरो, और अजित डोभाल ने मिलकर पंजाब की युवा पीढ़ी को नेस्तनाबूद करने में कोई कसर नहीं छोड़ीं।

पानी और खेती और उद्योग और पैसे की शक्ति सबसे अधिक टेक्स पंजाब का और फायदा सारे देश को, और गद्दारी भी पंजाब से, इस नीति का कारण क्या है ?

मैं इसी पर विचार कर रहा था।

हर अपराध के पीछे एक मोटिव होता है।

तो पंजाब को बर्बाद करने का मोटिव क्या है ?

ये मुझे अब समझ आया है।

अभी कुछ दिन पहले एक फिल्म आयी थी नाम था केसरी।

जिसमे बॉलीवुड के एक अभिनेता ने सारागढ़ी के महान शहीद ईश्वर सिंह और उनके बीस विश्व के सबसे बढ़े शूरवीरों की गाथा बताई गयी।

उस फिल्म में एक मुल्ला दिखाया गया जो विरोधी की सेना के जवानों को भी घायल होने पर पानी पिलाने वाले को बड़ी बेदर्दी से मारता है।

अब कोई प्रश्न पूछे की उसका उस देशभक्त जाँबाज जनसेवक को जान से धोख़े से निहत्ता सेवा करते हुए को वीभत्स तरीके से जान से मारने का मोटिव क्या था ?

है किसी के पास ज़वाब!

यही वीभत्स क़त्ल भारत सरकार ने आजतक ख़ालसा सिख और पंजाबियत के साथ किया।

अब इसका मोटिव केवल एक नज़र आ रहा है जिसके कई नाम हैं नमकहराम, हरामखोर, देशद्रोही, जनभक्षक, खटमल, पिस्सू , जोंक, लकड़बग्गा, ये सब तो अपना पेट भरने के लिए खून पीते हैं।

तो भारत सरकार क्यों खालसा, सिख, पंजाबियत के साथ नमकहरामी, हरामखोरी, जनभक्षण का काम कर रही है ?

सीधा मोटिव है।

देशभक्ति, जनसेवा, ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता, क़ुरबानी, ईश्वर रूपी इंसान से इंसान से प्रेम वाली भावना को पनपने नहीं देना।

अगर देशभक्ति, जनसेवा, ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता, क़ुरबानी, ईश्वर रूपी इंसान से इंसान से प्रेम वाली भावना सभी में आ गयी तो भारत से बेईमानी, झूठ, देशद्रोहिता, नफ़रत, भरष्टाचार, अपराध, नशाखोरी, ग़द्दारी सभी बुरे जनविरोधी कार्य समाप्त हो जायेंगे।

और सरकारी जेलें, पुलिस थाने, अदालतें, विधान सभाएं, लोकसभाये, राजयसभाये, अस्पताल, शिक्षा की दुकाने बन्द हो जायेंगी, टेक्स की जरूरत ही नहीं रहेगी।

तो ये हरामखोरों की सरकारें ख़ून कैसे पियेंगी।

ख़ालसा, सिख, पंजाबियत हर बुरे काम का विरोध करती है, इसी लिए सरकार खालसा यानी एक सौ प्रतिशत शुद्ध सिख पंजाबी समाज़ को ही समाप्त करना चाहती है, ताकि अच्छाई और लोकसेवा की बात करने वाला ही ना रहे, और सरकार सभी गलत, अलोकतांत्रिक, अदूरदर्शी, अनैतिक, आपराधिक, भरष्टचारी सोच वाले काम करती रहे।

यही 1947 से यां उससे पहले की सरकारें करती रही हैं।

पंजाब को 1947 में फिर जलाया, लूटा, मारा गया।

हरिमन्दिर साहिब ख़ालसा सिखों पंजाबियत के सबसे बढ़े मंदिर पर अलोकतांत्रिक तरीके से बिना किसी लिखित सरकारी आदेश अथवा भारत की सभी राजनैतिक पार्टियों की रज़ामन्दी के बग़ैर सेना से हमला करवाया गया, बेक़सूर निहत्ते बच्चों, बूढ़ों, युवकों, महिलाओं को संगत के रूप में जो वहां मौजूद थे घोखे से बिजली, पानी, राशन बन्द करके मारा गया।

फिर दिल्ली और भारत के विभिन्न हिस्सों में निहत्थे ख़ालसा सिख और पंजाबी को बड़ी ही बेरहमी के साथ जिन्दा जलाकर, मारा गया, महिलाओं बच्चियों के बलात्कार किये गए, चार दिन सारे देश के देशभक्ति, जनसेवा, ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता, क़ुरबानी, ईश्वर रूपी इंसान से इंसान से प्रेम वाली खालसा सिख पंजाबी कौम को नेस्तनाबूद किया गया।

सारे देश का तथाकथित नमकहराम देशद्रोही सभी राजनैतिक पार्टियां, संसद, सुप्रीम कोर्ट चुप रहा।

अरबों लाहनतें तुम सभी भारतवासी हिन्दुओं और आरएसएस के हरामखोरों को जिन्होंने चुप रहकर कांग्रेसियों का साथ दिया।

उसके बाद तुम लोगों ने खालसा सिख पंजाबियत की युवा पीढ़ी को सिंथेटिक नशे और गंदे गानों की दलदल में धकेला।

तरह तरह की हेयर स्टाइल और गंदी फिल्मों और गंदे साहित्य से तुमने खालसा सिख पंजाबियत की युवा पीढ़ी को बर्बाद करना चाहा।

जब उससे भी तुम्हारा पेट न भरा तो आज तुम खालसा सिख पंजाबियत के पूर्व, वर्तमान, और भविष्य को बर्बाद करने के लिए पूरे देश को बेच रहे हो।

आज उसी भारत सरकार को आरएसएस और भाजपा की अलोकतांत्रिक, अदूरदर्शी, अनैतिक, आपराधिक, भरष्टचारी सोच वाली सरकार फिर से खालसा सिख पंजाबियत ही नहीं पूरे देश को बेचना चाहती है।

मोदी तुमने और तुम्हारी भारत सरकार ने आरएसएस के साथ मिलकर जो देश को बर्बाद करने का बीड़ा उठाया है खालसा सिख पंजाबियत और अब दूरदर्शी हिन्दू मुस्लिम ईसाई सभी मिलकर आरएसएस और भाजपा की अलोकतांत्रिक, अदूरदर्शी, अनैतिक, आपराधिक, भरष्टचारी सोच वाली निति के विरोध में आ गए हैं।

अब तेरी एक नहीं चलने वाली।

मोदी तू चाहे जिन्दा लोगों पर टेंक चढ़वा ले, चाहे फाइटर प्लेनो से गोले दगवा ले, या संबरीनो से हमले करवा ले।

क्योंकि इसके आलावा तूँ सभी कुछ कर ही चूका है।

मोदी तू प्रधान सेवक है, और सभी आईएस, आईपीएस, आईएफएस, इत्यादी सभी अधिकारी और मंत्री आम जनता के टेक्स का पैसा खाते हैं, देश का राष्ट्रपति भी देश की जनता का ही खाता है, सभी न्यायालय और उचतम्म न्यायालय भी देश की जनता का ही टेक्स खाता हैं, और तुम्हारा हर कदम पैसा लूटने का होता है।

सभी नागरिकों पर होने वाली हर कार्यवाही पैसा बनाने के लिए होती है, अराजकता फ़ैलाने के लिए होती है।

असल में तुम लोग राज नहीं माफिया राज चलाते हो।

राज जनता की सेवा के लिए होता है।

और माफिया जनता को लूटने के लिए।

दुनिया में अनेक देश हैं।

जहाँ जनता की सभी बुनियादी सुविधाएँ जन्म से मृत्यु तक ऑटोमेटिक मिलती हैं।

तुम्हारे राज में सभी कुछ उद्योगपतियों के भले के लिए बनाया जाता है, रिश्वत के लिए बनाया जाता है।

भारत की आम जनता और राजनैतिक पार्टियों के सारे देश के नेता देशभक्ति, जनसेवा, ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता, क़ुरबानी, ईश्वर रूपी इंसान से इंसान से प्रेम वाली खालसा सिख पंजाबी कौम जैसे हो जाएँ तो सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

अगर इन राजनैतिक पार्टियों के नेताओ में दूरदर्शिता हो तो ये जान जाएँ की भारत दुनियां का सबसे बढ़ा बाजार है।

हमारे देश भारत में अपना बनाया सामान बेचने वाले हर व्यापारी को चाहे वो देशी हो यां विदेशी इस शर्त पर माल बेचने की अनुमति दे की सारा सामान भारत में बनेगा, उसकी तकनीक भारत में विकसित होगी, सभी कार्य भारत के लोगों द्वारा किये जायेंगे, सभी वस्तुएं भारत में भारतियों द्वारा बनायीं जाएंगी, कोई भी सरकारी उपक्रम बेचा नहीं जायेगा, सभी सरकारी गैर सरकारी लोगों को ईमानदारी से काम करना होगा।

सभी की जवाबदेही होगी, जितना बढ़ा नेता यां अधिकारी उसकी उतनी बढ़ी जवाबदेही, और उतनी बढ़ी सज़ा होनी चाहिए।

सभी न्यायलय में डिसीजन का समस्य अधिकतम दो वर्ष होना चाहिए, प्राथमिक, मध्यमिक, उच्च, उचतम्म शिक्षा और तकनीक शिक्षा निशुल्क सभी के लिए होनी चाहिए, सभी के लिए स्वस्थ्य सेवाएं उच्तम स्तर की निशुल्क होनी चाहिए,

सभी को रोजगार मिलना चाहिए, सभी की सुरक्षा समान होनी चाहिए, नेताओं को तख्वाह काम की मिलनी चाहिए, पंचायत, नगर निगम, विधान सभा संसद सदस्यों को और लोगों की तरह काम दिया जाना चाहिए उनके काम की तनख्वाह देनी चाहिए, हरामखोरी की नहीं।

सभी शिक्षकों और सभी नौकरीपेशा लोगों की फिटनेस और दिमागी फिटनेस की जांच हर तीन महीने में होनी चाहिए। जमाखोरी और मिलावट करने वालो, और सभी अपराधियों को तीन महीने के अंदर सजा निर्धारित करके सश्रम उनको कारावास में रखना चाहिए।

सभी नेताओं को बिना सुरक्षा के आम नागरिकों की तरह रखना चाहिए।

जो अपनी सुरक्षा नहीं कर सकता वो जनता की सुरक्षा कैसे करेगा।

भारत के सभी सरकारी गैर सरकारी कार्यालयों को सीसीटीवी से जोड़कर मॉनिटर करना चाहिए।

पुलिस अधिकारीयों से सभी हमला करने वाले अस्त्र लेकर रक्षा करने वाले अस्त्र देने चाहिए।

जनता से अधिक माननीय कोई नहीं होना चाहिए।

देश की जनता सर्वोपरी होनी चाहिए।

राजनैतिक शिक्षा प्राप्त लोगों को राजनीती में प्रवेश देना चाहिए।

सभी फिल्मों और कार्यक्रमों को जनता के सामने प्रस्तुत होने से पहले चार चक्रों की जाँच से गुजरना चाहिए।

समस्त देश में चुनाव आधार कार्ड के ओटीपी से होना चाहिए।

सभी देश वासियों को रोजगार देना चाहिए।

किसी भी मंत्रालय या विभाग में काम करने का समय निर्धारित करके जनता को जवाब देने वाला बनाना चाहिए, देर होने पर अधिकारी पर बढ़ी कार्यवाही का प्रावधान होना चाहिए।

सभी अधिकारी समस्य समस्य पर जनता के बीच जाकर हर विभागीय गतिविधि का औचक निरिक्षण आवश्यक किया जाना चाहिए।

देश के सभी विमंत्रलयों और विभागों का समन्वय विभाग बनाकर कार्य करवाने चाहियें।

जनता की सभी बुनियादी सुविधाएँ निशुक्ल होनी अनिवार्य होनी चाहिए।

मिडिया सभी जनता के अनुरूप साधनो से जुड़ा हुआ होना चाहिए।

खालसा सिख पंजाबियत यही सोच रखती है।

जो केवल जनउपयोगी है।

इस लिए भारत की सभी सरकारें खालसा सिख और पंजाबियत से नफरत करती हैं।

भारत सरकार का मोटिव माफिया टाईप का आपराधिक है।

इसी लिए जनता की मांगों को दबाने का काम किया जाता है।

और खालसा सिख पंजाबियत इसका विरोध करती थी, करती है करती रहेगी।

आरएसएस और भाजपा की मोदी सरकार को चाहिए की सभी सरकारी उपक्रमों को वापिस अपने हाथ में लेकर, सभी अमानवीय गैर क़ानूनी आपराधिक और माफिया सोच के फैसले वापिस लेकर जनता से माफ़ी मांगे, और केवल जनउपयोगी काम करें अन्यथा अगर आरएसएस और भाजपा की सरकार नहीं सुधरी तो इसका विनाश बिलकुल निकट है।

हम हर जन विरोधी कार्य की भत्स्रना करते थे, करते हैं, करते रहेंगे।

अगर भारत सरकार नहीं मानी तो हम सारी दुनिया में अपनी मांगे रखकर अपना हक़ लेकर रहेंगे।

असल में मोदी की भाजपा सरकार जो काले कानून लेकर आयी है वो किसान विरोधी ही नहीं वो जन विरोधी हैं।

और ये कानून केवल उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाले हैं।

और भाजपा सरकार के लगभग सभी कानून उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाले हैं।

मोदी की भारत सरकार जनता के साथ अन्याय और उद्योगपतियों के साथ चमचागिरी जैसा वर्ताव कर रही है।

माल जनता का, खरीददार जनता, वोट देने वाली जनता, खरीददारी करने वाली जनता, टेक्स देने वाली जनता, खेती करने वाली जनता, मजदूरी करने वाली जनता और मजा लें नेता उद्योगपति सरकारी अधिकारी ये कैसा न्याय है।

हम इस प्रकार की व्यवस्था को बंद करके नयी व्यवस्था लेकर आएंगे।

जो केवल और केवल जनता के हक़ों के लिए हर कनून बनायेगी।

सर्वोपरी होगी नेता, अधिकारी, उद्योगपति नहीं।

चरणजीत सिंह

वरिष्ठ पत्रकार और समाज सेवक

9213247209

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